Sunday, November 30, 2008

मेरी किस्मत

तरह तरह के लोग मिले मिले ज़िन्दगी में,कोई अपना सा न लगा,
तरह तरह के फूल खिले दिल के बाग़ में कोई ज़िन्दगी महका न सका,
जाने ऊपर वाले मेरी किस्मत ऐसे क्यों लिखी की सब भूल गए बीते वक्त की तरह
और में चाहकर भी किसी को भुला न सका,,,,,,,

1 comment:

zindagi ki talash said...

मेरी त्रुटियों को माफ़ करना